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दिल्ली का वो दरवाजा जिसे मुगल बादशाह ने एक फकीर के नाम कर दिया! क्या आप जानते हैं तुर्कमान गेट का ये खौफनाक और रूहानी सच?

Historic Turkman Gate Delhi built by Mughal Emperor Shah Jahan.

दिल्ली का वो दरवाजा जिसे मुगल बादशाह ने एक फकीर के नाम कर दिया! क्या आप जानते हैं तुर्कमान गेट का ये खौफनाक और रूहानी सच?

Turkman Gate Delhi :  अगर आप दिल्ली वाले हैं या इतिहास के शौकीन हैं, तो आपने ‘तुर्कमान गेट’ का नाम तो सुना ही होगा। पुरानी दिल्ली की उन तंग गलियों और शोर-शराबे के बीच खड़ा यह दरवाजा सिर्फ पत्थर का एक ढांचा नहीं है, बल्कि अपने अंदर सदियों के राज और आंसू समेटे हुए है।

आज के इस वायरल ब्लॉग में हम बात करेंगे Turkman Gate Delhi की। आखिर कौन थे वो ‘शाह तुर्कमान’ जिनके नाम पर मुगल बादशाह ने इस गेट का नाम रख दिया? क्यों आज भी इस इलाके की हवाओं में एक अलग सी कशिश और कभी-कभी एक अनजाना डर महसूस होता है? चलिए, समय की मशीन में पीछे चलते हैं!

कौन थे हजरत शाह तुर्कमान बयाबानी? (The Man Behind the Name)

सबसे पहले उस शख्सियत के बारे में जानते हैं जिनके नाम पर यह ऐतिहासिक धरोहर टिकी है। इनका पूरा नाम था— शम्स-उल-अरीफीन हजरत शाह तुर्कमान बयाबानी।शाह तुर्कमान एक बहुत बड़े सूफी संत थे। दिलचस्प बात यह है कि वे मुगल काल से भी बहुत पहले, यानी 13वीं शताब्दी में दिल्ली आए थे। वे सुल्तान इल्तुतमिश के समकालीन थे। उनके नाम में जुड़ा शब्द ‘बयाबानी’ का मतलब होता है ‘जंगल में रहने वाला’। कहा जाता है कि उन्हें एकांत और प्रकृति से इतना लगाव था कि वे घने जंगलों (जो उस समय पुरानी दिल्ली का इलाका हुआ करता था) में इबादत किया करते थे।

शाहजहां ने क्यों दिया यह सम्मान?

जब 17वीं शताब्दी में मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी नई राजधानी ‘शाहजहानाबाद’ (पुरानी दिल्ली) बसाई, तो उन्होंने शहर की सुरक्षा के लिए 14 बड़े गेट बनवाए। शाहजहां सूफी संतों का बहुत सम्मान करते थे। शाह तुर्कमान की दरगाह उसी इलाके में थी जहाँ शहर की दीवार बन रही थी। उनकी लोकप्रियता और रूहानी ताकत को देखते हुए शाहजहां ने उस गेट का नाम Turkman Gate Delhi रख दिया।

तुर्कमान गेट की वास्तुकला: मुगलों की बेमिसाल इंजीनियरिंग

तुर्कमान गेट आज भी अपनी मजबूती के लिए जाना जाता है। यहाँ इसकी कुछ खास बातें दी गई हैं:

इतिहास के काले पन्ने: 1976 का वो मंजर

Turkman Gate Delhi का जिक्र तब तक अधूरा है जब तक हम 1976 के उस खौफनाक वाकये की बात न करें। इमरजेंसी (आपातकाल) के दौरान, दिल्ली के ‘सौंदर्यीकरण’ के नाम पर यहाँ बुलडोजर चलाए गए थे।

आज का तुर्कमान गेट: रूहानियत और रश का संगम

आज अगर आप Turkman Gate Delhi जाएंगे, तो आपको वहां एक अलग ही दुनिया मिलेगी। एक तरफ हजरत शाह तुर्कमान की दरगाह पर मिलने वाली रूहानी शांति है, जहाँ हर धर्म के लोग मन्नतें मांगने आते हैं। वहीं दूसरी तरफ पुरानी दिल्ली का मशहूर ट्रैफिक, कबाबों की खुशबू और खरीदारों की भीड़ है।

दरगाह के पास रजिया सुल्तान की कब्र: तुर्कमान गेट के पास ही एक और ऐतिहासिक राज दफन है। यहाँ से कुछ ही दूरी पर दिल्ली की पहली महिला शासक ‘रजिया सुल्तान’ की कब्र भी मानी जाती है। यह पूरा इलाका इतिहास की परतों से ढका हुआ है।

कैसे पहुंचें तुर्कमान गेट? (Travel Guide)

अगर आप इस ऐतिहासिक जगह को देखना चाहते हैं, तो यहाँ पहुंचना बहुत आसान है:

निष्कर्ष (Final Thoughts)

Turkman Gate Delhi हमें सिखाता है कि शहर बदलते हैं, शासक बदलते हैं, लेकिन जो नेक इंसान (जैसे शाह तुर्कमान) होते हैं, उनका नाम सदियों तक जिंदा रहता है। यह गेट दिल्ली की रूह का एक अटूट हिस्सा है।

अगली बार जब आप यहाँ से गुजरें, तो बस इसे एक पत्थर का दरवाजा समझकर न छोड़ दें। एक पल रुकें और सोचें कि इन पत्थरों ने दिल्ली को बनते और उजड़ते देखा है।

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