जी हां, हाल ही में मशहूर मुस्लिम एक्ट्रेस फलक नाज़ (Falaq Naazz) ने टेलीविजन इंडस्ट्री के एक ऐसे चौंकाने वाले सच का खुलासा किया है, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। फलक ने सीधे तौर पर प्रोडक्शन हाउस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

फलक नाज़ का बड़ा बयान: ‘मुझसे मांगी गई कुंडली

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपने हालिया इंटरव्यू में फलक नाज़ ने बताया कि कैसे उन्हें एक बड़े प्रोजेक्ट से सिर्फ इसलिए हाथ धोना पड़ा क्योंकि उनकीकुंडलीमैच नहीं हुई। फलक कहती हैं, “आजकल प्रोडक्शन हाउस टैलेंट या लुक से ज्यादा इस बात पर ध्यान देते हैं कि एक्टर की कुंडली प्रोड्यूसर या शो के साथ मेल खाती है या नहीं।

यह सुनना वाकई अजीब लगता है कि 2024-25 के इस आधुनिक दौर में, जहाँ हम चांद पर पहुँच रहे हैं, वहां एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कुंडली देखकर काम देने का चलन बढ़ रहा है।

प्रोडक्शन हाउस की पोल: क्यों जरूरी है ज्योतिष?

फलक ने किसी खास का नाम लिए बिना संकेत दिया कि कई बड़े मेकर्स (जैसे एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस का उदाहरण अक्सर दिया जाता है) ज्योतिष और अंकशास्त्र (Numerology) में बहुत विश्वास रखते हैं।

  • अंधविश्वास या व्यापार?: मेकर्स का मानना है कि अगर लीड एक्टर्स की कुंडली शो के साथ मेल नहीं खाती, तो शो फ्लॉप हो सकता है।
  • मुस्लिम एक्टर्स के लिए चुनौती: फलक ने दर्द साझा किया कि एक मुस्लिम होने के नाते उनके पास जन्मपत्री या उस तरह की कुंडली नहीं होती जैसी अक्सर मांगी जाती है। ऐसे में क्या टैलेंटेड एक्टर्स को सिर्फ इसलिए रिजेक्ट कर दिया जाएगा?
  • कास्टिंग का नया पैमाना: अब ऑडिशन के साथसाथएस्ट्रोचेकभी कास्टिंग प्रोसेस का हिस्सा बनता जा रहा है।

क्या एकता कपूर के नक्शेकदम पर हैं बाकी मेकर्स?

इंडस्ट्री में यह जगजाहिर है कि एकता कपूर अपने शोज के नाम ‘K’ अक्षर से रखती थीं और ज्योतिषियों की सलाह मानती थीं। लेकिन अब फलक के दावे के बाद यह बहस छिड़ गई है कि क्या अब हर छोटाबड़ा प्रोडक्शन हाउस कुंडली देखकर काम देने के इस ढर्रे को अपना रहा है? फलक का कहना है कि यह प्रैक्टिस अब हद से ज्यादा बढ़ गई है, जिससे नए और मेहनती कलाकारों का मनोबल टूट रहा है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग: फैंस के रिएक्शन

जैसे ही यह खबर बाहर आई, ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर फैंस दो गुटों में बंट गए हैं:

  • सपोर्टर्स: बहुत से लोग फलक की हिम्मत की दाद दे रहे हैं कि उन्होंने इसअंधविश्वासके खिलाफ आवाज उठाई।
  • आलोचक: कुछ का कहना है कि यह प्रोड्यूसर का अपना पैसा है, वह जिसे चाहे वैसे कास्ट करे।

लेकिन सवाल वही रहता हैक्या कुंडली देखकर काम मिलना एक प्रोफेशनल इंडस्ट्री के लिए सही संकेत है?

इंडस्ट्री के कुछ और काले सच

सिर्फ कुंडली ही नहीं, फलक ने और भी कई मुद्दों पर बात की

  • पेमेंट में देरी: छोटे पर्दे के कलाकारों को महीनों तक अपनी मेहनत की कमाई का इंतज़ार करना पड़ता है।
  • धार्मिक भेदभाव?: क्या कुंडली मांगना एक तरह से खास समुदाय के लोगों को बाहर रखने का तरीका है? फलक के बयान ने इस चर्चा को भी हवा दे दी है।
  • मानसिक तनाव: जब एक कलाकार को पता चलता है कि वह रिजेक्ट इसलिए हुआ क्योंकि उसकेग्रहठीक नहीं थे, न कि उसकी एक्टिंग, तो यह मानसिक रूप से बहुत कष्टदायक होता है।

निष्कर्ष: टैलेंट बनाम तकदीर

अंत में, फलक नाज़ का यह खुलासा हमें सोचने पर मजबूर करता है। सिनेमा और टीवी को हम कला का माध्यम मानते हैं, लेकिन अगर यहाँ भी कुंडली देखकर काम तय होने लगा, तो असली टैलेंट शायद कभी सामने ही न आ पाए। मेकर्स को समझना होगा कि एक हिट शो कड़ी मेहनत, अच्छी स्क्रिप्ट और बेहतरीन एक्टिंग से बनता है, न कि सिर्फ कुंडली के मिलान से।

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