NEET विरोध प्रदर्शन और लाठीचार्ज : देश के लाखों युवाओं और भावी डॉक्टरों का भविष्य इस समय दांव पर लगा हुआ है। नीट (NEET) परीक्षा में धांधली, धांधली के आरोप और पेपर लीक की खबरों ने पूरे देश के छात्रों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। लेकिन जब अपनी जायज मांगों को लेकर युवा सड़क पर उतरे, तो उन्हें जवाब में क्या मिला? लाठियां, पानी की बौछारें और पुलिस की सख्त कार्रवाई!
नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ जगह–जगह हो रहे प्रदर्शनों के बीच NEET विरोध प्रदर्शन और लाठीचार्ज की घटना ने अब एक बड़े राजनीतिक तूफान का रूप ले लिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर करारा प्रहार किया है। अखिलेश यादव ने न सिर्फ छात्रों पर हुए बल प्रयोग की कड़े शब्दों में निंदा की है, बल्कि प्रदेश और देश में बार–बार हो रहे पेपर लीक के सिलसिले पर भी कई तीखे सवाल खड़े किए हैं। आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले में अखिलेश यादव ने क्या–क्या बड़े आरोप लगाए हैं और आखिर क्यों नीट परीक्षा का यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है!
क्या है पूरा मामला? सड़कों पर क्यों उतरे छात्र?
नीट (NEET) देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसके जरिए लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं। लेकिन इस बार नतीजों के बाद से ही गड़बड़ियों के आरोप लगने शुरू हो गए।
- असामान्य अंक और ग्रेस मार्क्स: एक ही सेंटर से कई टॉपर निकलना और अजीबोगरीब ग्रेस मार्क्स मिलना।
- पेपर लीक के आरोप: परीक्षा से ठीक पहले सोशल मीडिया और विभिन्न गिरोहों के जरिए पेपर लीक होने के गंभीर दावे।
- सड़कों पर आक्रोश: जब छात्रों की सुनवाई नहीं हुई, तो दिल्ली, लखनऊ और पटना समेत कई बड़े शहरों में हजारों छात्र और अभिभावक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतर आए।
प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग केवल इतनी है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच (CBI Probe) कराई जाए और यदि धांधली साबित होती है तो परीक्षा दोबारा आयोजित की जाए।
NEET विरोध प्रदर्शन और लाठीचार्ज पर अखिलेश यादव का जोरदार हमला
जब छात्र शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, तभी कई जगहों पर पुलिस और छात्रों के बीच तीखी झड़प हुई। प्रदर्शन को दबाने के लिए हुए बल प्रयोग और लाठीचार्ज का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, राजनीति गर्मा गई।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो सरकार युवाओं को रोजगार और पारदर्शी परीक्षाएं नहीं दे सकती, वह अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए लाठियों का सहारा ले रही है।
अखिलेश यादव का बयान: “हमारा देश युवाओं का देश है, लेकिन बीजेपी सरकार ने युवाओं के सपनों को चकनाचूर कर दिया है। जब छात्र अपने हक और पारदर्शी परीक्षा की मांग करते हैं, तो उन पर लाठियां बरसाई जाती हैं। पेपर लीक होना अब कोई संयोग नहीं, बल्कि बीजेपी राज का एक बड़ा प्रयोग बन चुका है।“
पेपर लीक का ‘क्रॉनोलॉजी‘: अखिलेश यादव के 4 बड़े सवाल
अपनी पीसी और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव ने NEET विरोध प्रदर्शन और लाठीचार्ज के बहाने बीजेपी सरकार को पूरी तरह कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सरकार से चार प्रमुख सवाल पूछे:
1.बार–बार क्यों हो रहे हैं पेपर लीक? .
चाहे पुलिस भर्ती हो, शिक्षक भर्ती हो या फिर राष्ट्रीय स्तर की नीट परीक्षा—हर बार पेपर लीक की खबरें ही क्यों आती हैं? आखिर इन माफियाओं को किसका संरक्षण प्राप्त है?
2.जांच एजेंसियों की ढिलाई क्यों? .
जब धांधली के इतने सारे सबूत और गिरफ्तारियां सामने आ रही हैं, तब भी सरकार शुरुआत में धांधली की बात से इनकार क्यों करती रही?
3.छात्रों पर ही लाठियां क्यों? .
दोषियों और पेपर लीक कराने वाले माफियाओं को पकड़ने के बजाय पुलिस की लाठियां बेकसूर छात्रों और उनके माता–पिता पर क्यों चल रही हैं?
4.भविष्य के साथ खिलवाड़ कब रुकेगा? .
सालों तक दिन–रात पढ़ाई करने वाले मेहनती बच्चों का भविष्य पैसों के दम पर सीटें खरीदने वालों के आगे कब तक बलि चढ़ता रहेगा?
युवाओं का टूटता भरोसा: देश के लिए खतरनाक संकेत
नीट परीक्षा से जुड़ा यह विवाद सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की साख से जुड़ा हुआ सवाल है। जब कोई छात्र सालों तक कोचिंग करता है, अपने परिवार के गाढ़े पसीने की कमाई इसमें लगाता है और अंत में उसे पता चलता है कि पेपर पहले ही बिक चुका था, तो उसका न्याय प्रणाली से भरोसा उठने लगता है।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार परीक्षाओं की शुचिता (Sanctity) बनाए रखने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। जब युवा अपनी बात रखने के लिए बाहर आते हैं, तो NEET विरोध प्रदर्शन और लाठीचार्ज जैसी घटनाएं उनके आक्रोश को और भड़का देती हैं।
आगे क्या होगा? क्या मिलेगी छात्रों को राहत?
फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है और विभिन्न याचिकाएं दाखिल की गई हैं। कोर्ट ने भी माना है कि परीक्षा की पवित्रता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता और यदि थोड़ी भी लापरवाही हुई है तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
दूसरी तरफ, विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक पूरी ताकत से उठाने की तैयारी में हैं। अखिलेश यादव समेत कई प्रमुख नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पीड़ित छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक समाजवादी पार्टी युवाओं की आवाज बनकर संघर्ष करती रहेगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार और जांच एजेंसियां इस मामले में क्या ठोस कदम उठाती हैं, ताकि भविष्य में किसी भी परीक्षा में ऐसा खिलवाड़ न हो और छात्रों का खोया हुआ विश्वास वापस लौट सके।




